2007-08-05

विश्वाश बन के जिन्दगी में आते है लोग
ख्वाब बन कर आँखो में समा जाते हैं लोग
पहले वो यकीन दिलाते हैं कि वो हमारे हैं
और फिर ना जाने क्यों इतनी जल्दी बदल जाते हैं लोग।

चन्द शब्द जिस पे जरा गौर फरमाइयेगा,,,

जान से भी ज्यादा उन्हे प्यार करते थे
याद दिन रात उन्हे किया करते थे
अब मुझे उन राहो से गुजरा नहीं जाता
जहाँ बैठकर उनका इन्तजार किया करते थे।

2007-07-06

कभी-कभी

कभी-कभी मैं सोचता हुँ कि
वो मेरे बारे में ही सोचती हैं।
बस यही सोच कर ही
अपने दिल को दिलाशा दे देते हैं।
हर जगह हर महफिल में
उनका नाम लिया करते हैं।
बस हम ही हैं जो अपने दिल को
इस तरह जलाया करते हैं।
उम्मीद है मुझको उनसे कभी इकरार-ऎ-मुहब्बत् का,
बस यही सोच कर हमये जिन्दगी जिया करते हैं।

2007-07-03

दुनिया ये साइंन्श की दुनिया

बढी़ जा रही है दुनिया,चली जा रही है दुनिया।
हर कदम पे तरक्की,हर तरफ है कामयाबी का बाजार।
खेती - बाडी़ व खान-पान,रोटी कपडा और मकान।
मन्दिर,मस्जिद और गुरुद्वार, रोग,व्याधि,कल्पना और विचार।
सब पर भारी पडता है ऑज का विञान।।
नई तकनीकि और ग्लोबलाइजेशन का बाजार।
हर फिल्ड मे है साइंन्श, सरताज।
अच्छी है ये तरक्की, अच्छा है नये सपनो का संसार।
परिन्दो सी उड़ान और सुरज,चांद,तारो को वश मे करने का अंदाज।
पर इन करतबो कारनामो में कँहा गुम हो गई इंसान की अपनी पहचान।
उसकी नम्रता उसके गुण उसके ऑत्म स्वाभिमान।
खुद्दारी , ईमानदारी व इस धरती से अपना लगाव।
कहाँ गुम हो गयी हमारी संस्कृति हमारी मान मर्यादा,
और बुजुर्गो का पढ़ाया सत्चरिऋता का पाठ।
ढुंढ लावो ऎ विञान हमारी वो ईमानदारी।
सच्चाई और इंन्सानियत का वो संस्कार।
बढी जा रही है दुनिया,चली जा रही है दुनिया।
हर कदम पे तरक्की,हर तरफ है कामयाबी का बाजार।

2007-06-30

दोस्ती और उसकी सीमायेँ

दोस्त मै आपके बारे में क्या लिखु
लिखता हुँ तो स्याही काम पड जाती है।
दोस्त मै आपके बारे में क्या पढुपढता हुँ
तो किताब कम पड़ जाती है।
बन्धन की बात करता हुँ तो
रस्सी कम पड़ जाती है।
सच्चाई की बात करता हुँ तो
मेरी ईमानदारी कम पड़ जाती है।
विश्वाश की बात करता हुँ तो
ज़बान कम पड़ जाती है।
कुछ कहना चाहता हुँ अगर तुमसे
तो इतिहास कम पड़ जाता है।
कुछ आकार देने की कोशिश करता हुँ तो
यह धरती कम पड़ जाती है।कुछ नाम अगर देना चाहुँ तो
पुरी दुनिया कम पड़ जाती है।
दोस्त मै आपके बारे में क्या क्या सोचु
सोचता हुँ तो जिन्दगी कम पड़ जाती है।
दोस्त मै आपके बारे में क्या लिखु
लिखता हुँ तो स्याही काम पड जाती है।

2007-06-19

दोस्ती और मौत

तेरे हर दर्द को मुझसे गुजर कर जाना होगा।
दुनिया कुछ भी कहे तु मुझसे बेगाना ना होगा।।
मरने की बात क्यों करते हो दोस्त,मैं अभी हुँ,
तेरे पास ऑने से पहले मौत को भी मुझसे इजाजत् लेना होगा।।

2007-06-15

इन्तजार और प्यार

ज़ब कभी ऑख में अश्क भर ऑऍ।
कुछ लोग डुबते नजर ऑऍ।
हम इन्तजार कर रहे थे जिनका बरसो से,
मेरा नसीब है कि ऑज मेरे दर पे नजर ऑऍ।

2007-06-14

व़फा प्यार और इकरार

करते है मुहब्बत् के वादे,वो अपनी इन्तजार और प्यार में।

दुनिया का दामन जब हमने छोड़ा,

तो उसने कहां छोड़ दिया मुझे बीच मझधार में।

तब्बसुम का हर कतरा सम्भाल रखा था उनकी खातिर,

वो चन्द लब्ज ना जुटा पायी हमारे इजहार-ऍ-इकरार में।

हर जन्म में निभाने का वादा वो करती थी मुझसे,

लेकिन इस जन्म में वफा ना कर पायी इस नाचींज के प्यार में।।

नवीन- true Indian कि तमन्ना

जब ऑपको तमन्ना मेरी थी॰॰॰॰
तब ऑप चाहती थी कि मै दिलो जान से प्यार करु।
अब ऑपको किसी और की तमन्ना है॰॰॰॰॰
तो फिर मै किस की तमन्ना अब करु।
जिक्र जब ऑपकी होती है किसी महफिल मे॰॰॰॰॰
तो मै ऑपको अपनी तमन्ना कैसे बयान करु।
नवीन की बस यही तमन्ना है कि॰॰॰॰॰॰॰
अब ऑप मेरी हो मेरी तमन्ना हो जाय।
औरो की तमन्ना और भी पूरा करे॰॰॰॰॰॰
मेरी तमन्ना मेरी है तो इसमे मै क्या करु।
मेरी तमन्ना का इन्तजार ऑज भी है इस नाचीज को॰॰॰॰
मेरे ख्वाबो मे ऑकर मेरी तमन्ना पूरी करो॰॰॰॰॰॰॰
चैन से मै मर सकू इसमे मै क्या करु।
मेरी तमन्ना मेरी है तो इसमे मै क्या करु।
नवीन- true Indian

मेरी पहली कोशिश ऑपके विचारो का स्वागत् है।- 'सावन का महिना'

सावन का महिना जब जब याद ऑता है।
मुझे उसकी याद दिला देता है॰॰॰॰॰॰॰
वो बागो मे घुमना वो बारिश मे भीगना,
उसकी चेहरे कि मुस्कान की याद दिला देता है।
करते थे कुछ बाते मीठी मुस्कान के साथ,
वो रिमझीम बारिश मे टहलना याद ऑता है।
याद ऑता है मुझको उसके साथ बिताये हुये हर पल,
वो ऑम के बाग मे टहलना याद ऑता है।
कभी हम दुर तलक जाते थे साथ-साथ,
और फिर उसके ऑचल मे चेहरा छुपाना याद ऑता है।
किसी ने देखा ना था हमको कभी ऍक साथ,
ऑज सबको;हमारे साथ बीताये हुऍ हर पल याद ऑता है।
उसकी डोली गयी थी मेरे नजर के ही सामने,
उसकी याद मे हर पल रोना याद ऑता है।
फिर कभी मिलेगे किसी जन्म मे हम तुमसे,
उसकी यह दी हुई कसम याद ऑता है।
सावन का महिना जब जब याद ऑता है।
मुझे उसकी याद दिला देता है॰॰॰॰॰॰॰
ऑभारी
नवीन -True Indian